विधान सभा सचिवालय

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*राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव*

*बाबा साहब ने संविधान में भेद नहीं आने दिया, यह 2047 का हमारा सूत्र: विधान सभा अध्यक्ष श्री तोमर*

*तीन राज्यों के युवा विधायकों का दो दिवसीय सम्मेलन, सशक्त लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी पर मंथन*

 

                                                                                                            भोपाल : 30 मार्च, 2026

यह मानना कि लोकतंत्र के विचार की उत्पत्ति पश्चिम से हुई थी, पूर्णत: सत्य नहीं है। लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारतीय व्यवस्थाओं में सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है, राजनैतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में शास्त्रार्थ की परम्परा प्राचीन समय से रही है। भारत में विचारों की अभिव्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सम्मान और महत्व प्रदान किया गया। युवा विधायकों से भी यही उम्मीद है कि वे  राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन का पालन करें। वे जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील हों, अध्ययनशील हों, तनाव प्रबंधन में दक्ष हों और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करें।

यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मध्यप्रदेश विधान सभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही। विधान सभा के विधान परिषद हॉल में आयोजित  यह सम्मेलन वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार विशेष रूप से उपस्थित थे। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति में वे ही सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कोई समस्या आने पर जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समस्या निराकरण के लिए उनका प्रबंधन कौशल, उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। सकारात्मक और समाज हित की गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए हमें दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। राज्य के प्रबंधन में लगे लोगों ने ही उनके बाद व्यवस्थाएं संभाली। ऐसे महान शासकों का मानना था कि यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और सत्ता से जुड़े लोगों का अपने परिवार को समय देना और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के अभाव में अगली पीढ़ी द्वारा यश प्रभावित करने की संभावना बनी रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर से विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए। 

 

*विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवा जनप्रतिनिधियों की अहम जिम्मेदारी: मप्र विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर*

 

मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है।भारत का लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होता है। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने प्रतिबद्ध और नैतिक हैं। खुद बाबा साहब को अपने जीवन में अनेक असमानता व भेदभाव का सामना करना पड़ा था लेकिन उस समय की इन कुप्रथाओं को उन्होंने संविधान में नहीं आने दिया। सम्मेलन में शामिल युवा विधायकों से 2047 के विकसित भारत के निर्माणा सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए श्री तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के माध्यम से मतदाता पंजीयन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है। श्री तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश विधान सभा ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने युवा विधायकों से आह्वान किया कि वे संसदीय परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीर अध्ययन करें, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेकर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बीच वर्तमान का सशक्त पुल युवा नेतृत्व ही बन सकता है।

 

*जनता और शासन के बीच सेतु बने विधायक: श्री वासुदेव देवनानी*

 

अध्यक्ष राजस्थान विधान सभा, श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य दायित्व जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब जनता, विधायिका और शासन की प्रक्रियाओं के बीच पारदर्शिता और सहभागिता बढ़े। उन्होंने कहा कि विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अध्ययन, चिंतन और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के माध्यम से समाज के विकास में सक्रिय योगदान दें। एक प्रभावी विधायक वही है जो सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले, प्रश्न पूछे, मुद्दों पर तैयारी के साथ चर्चा करे और जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाए। श्री देवनानी ने कहा कि विधान सभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच है। इसलिए आवश्यक है कि विधायकों में अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित हो और वे संसद एवं विधान सभा की परंपराओं और प्रक्रियाओं की गहन समझ रखें। उन्होंने भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

 

*सशक्त लोकतंत्र के लिए सशक्त जनप्रतिनिधि आवश्यकः संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय*

 

प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रजातंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन है। अत: लोकतंत्र के सशक्त होने के लिए जनप्रतिनिधि का सशक्त होना आवश्यक है। विधायक होना बहुत महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है, विधायक बड़ी जनसंख्या की आशाओं, आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी दुख, तकलीफों, अपेक्षाओं को वाणी प्रदान करते हैं। विधायकगण अपने विधान सभा क्षेत्र का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा विधायकों को संयत व्यवहार रखने, जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके निराकरण की ठोस कोशिश करने, कार्यालय प्रबंधन के लिए संवेदनशील और सक्रिय स्टाफ रखने, अद्यतन डिजिटल तकनीकों के उपयोग में समय के साथ चलने की सलाह दी। सस्ती लोकप्रियता के लिए की गई गतिविधियां दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं।

नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक बनने के साथ ही हमारी स्वयं की कई अपेक्षाएं होती हैं। विधान सभा क्षेत्रवासी भी विधायक को विकास, जनसुविधा और जनकल्याण के कार्यों के लिए बहुत आशा से देखते हैं। विधायक का पद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को मुखर करने का प्रभावी माध्यम है। अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा विधायकों को विधान सभा की बैठकों में अधिक से अधिक भाग लेने तथा विकास के नाम पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित किया। श्री सिंघार ने कहा कि युवा वर्ग में यह धारणा बनती जा रही है कि राजनीति बहुत खराब है और वे इस विचार के कारण राजनीति में आने से बच रहे हैं। देश हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इस विचार को बदलने की आवश्यकता है। 

 

*युवा विधायकों ने जताया संकल्प व विकसित भारत के इरादे*

 

मध्यप्रदेश विधान सभा प्रांगण में आयोजित युवा विधायक सम्मेलनभारतीय लोकतंत्र के भविष्य को दिशा देने वाले विचार मंथन क एक महत्वपूर्णमंच बना। सम्मेलन के पहले दिन मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 29 युवा जनप्रतिनिधियों ने सेवा, समर्पण और नवाचार की योजना व रणनीति के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण का संकल्प व्यक्त किया।

 

मध्यप्रदेश के विधायक श्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सदन के साथ-साथ अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता से निरंतर जुड़े रहना चाहिए। सीमित संसाधनों में विकास की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बेहतर समन्वय तथा समिति व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।

 

राजस्थान की विधायक श्रीमती दीप्ति किरण माहेश्वरी ने महिला जनप्रतिनिधियों के जीवन में कार्य और परिवार के बीच संतुलन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक और गुणात्मक परिवर्तन लाना ही राजनीति का वास्तविक उद्देश्य है। वहीं विधायक श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल ने बुनियादी ढाँचे और सड़कों की समस्याओं के समाधान के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए विकासोन्मुख दृष्टिकोण साझा किया।

 

मध्यप्रदेश की विधायक श्रीमती प्रियंका पैची ने कहा कि लोकतंत्र पारदर्शिता और समावेशी विकास का प्रतीक है तथा विधायक जनता और सरकार के बीच एक विश्वसनीय सेतु की भूमिका निभाते हैं। विधायक सुश्री मंजू दादू ने अंत्योदयकी भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि विधायक को शासक नहीं बल्कि सेवक के रूप में कार्य करना चाहिए।

 

विधायक श्री सिद्धार्थ कुशवाह ने लोकतंत्र में जनविश्वास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और युवाओं को स्वावलंबन के अवसर प्रदान करने पर बल दिया। उन्होंने विरासत के संरक्षण के साथ आधुनिक विकास को भविष्य की समृद्धि का आधार बताया।

 

राजस्थान के विधायक श्री गुरुवीर सिंह ने अनुसंधान बजट में वृद्धि, उच्च शिक्षा में नामांकन दर बढ़ाने और सीमांत किसानों के उत्थान के लिए सिंचाई प्रणाली के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने खेलों में वैश्विक मानकों को अपनाने और ओडिशा के हॉकी मॉडल की तर्ज पर खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।

 

छत्तीसगढ़ के विधायक श्री खुशवंत सिंह ने कहा कि युवाओं को रोजगार खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बनने के लिए तकनीकी शिक्षा और डिजिटल विस्तार को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के लिए युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

 

मध्यप्रदेश की श्रीमती प्रतिमा बागरी, राज्य मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह क्षेत्र की समस्याओं को सदन तक पहुँचाकर उनके समाधान को जनता तक प्रभावी रूप से पहुँचाए। उन्होंने स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक ऊर्जा के उपयोग को विकसित भारत के लिए आवश्यक बताया।

 

विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह ने बुंदेलखंड क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है।

 

मध्यप्रदेश के विधायक श्री हेमंत कटारे ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। उन्होंने छात्रसंघ चुनावों को पुनः प्रारंभ करने और शिक्षा, कौशल तथा रोजगार में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

 

राजस्थान के विधायक श्री रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए जनप्रतिनिधियों से जनता के साथ निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया।

 

छत्तीसगढ़ की विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की पहली जिम्मेदारी अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाना और उनके समाधान के लिए कार्य करना है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

 

मध्यप्रदेश के विधायक सर्वश्री घनश्याम चंद्रवंशी, महेश परमार, गौरव परिधि, अरविंद पटेरिया, राजस्थान की विधायक डॉ. शिखा मील बराला, छत्तीसगढ़ की विधायक श्रीमती कविता प्राण लहरे आदि ने अपने विचार रखे।

 

*16वीं विधान सभा के नवाचारों पर फिल्म आकर्षण का केंद्र*

 

युवा विधायकों के इस सम्मेलन में मध्यप्रदेश की 16वीं विधान सभा के दो वर्षों के कार्यकाल पर बनी फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म में विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व व मार्गदर्शन में हुए नवाचारों व उनके प्रभावों को रेखांकित किया गया है। संसदीय प्रक्रिया को सर्वसमावेशी बनाने सहित विभिन्न नवाचारों को युवा विधायकों ने प्रेरक बताया।

 

*समापन दिवस पर उपसभापति राज्यसभा श्री हरिवंश का संबोधन*

 

सम्मेलन के दूसरे दिन 31 मार्च को विकसित भारत 2047− युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियांविषय पर मंथन होगा। इस दिन अन्य सत्रों के अलावा एमआईटी पूना के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड का संबोधन होगा।

 

समापन समारोह को राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश संबोधित करेंगे। समापन सत्र में मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय एवं नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार का संबोधन भी होगा।

 

विस/जसं/26 

                                                                                                                               नरेंद्र मिश्रा 

                                                                                                                              अवर सचिव